Wednesday, August 24, 2016

कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी को बधाई : यदा यदा हि धर्मस्य ---

मित्रो !
           आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी पर बहुत-बहुत बधाई, आप सभी को जन्माष्टमी मंगलमय हो। इस अवसर पर आपके समक्ष श्रीमद भगवद्गीता के अध्याय 4 से श्लोक 7 8 प्रस्तुत कर रहा हूँ।
यदा यदा हि धर्मस्य  ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
हे भारतवंशी अर्जुन! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात साकार रूप से प्रकट होता हूँ।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय   सम्भवामि युगे युगे।।

साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ। 


Sunday, August 14, 2016

गुनाहों का बोझ हल्का करते चलें

  • मित्रो !
    .
    आदमी को चाहिए कि वह गुनाह करने से बचे और यदि कोई गुनाह हो भी जाता है तब उसका बोझ हल्का करने के लिए कोई एक नेक कर्म करे। न जाने अंत में गुनाह याद करने का वक़्त मिले या न मिले और अगर मिले भी तो उन्हें हल्का करने के लिए वक़्त कम पड़ जाय। 
      यों तो कर्म-फल सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक कर्म का एक फल होता है, बुरे कर्म का फल बुरा और अच्छे कर्म का फल अच्छा होता है। अतः गुनाहों का फल बुरा होना निश्चित है किन्तु एक नेक कर्म कर लेने से गुनाह करने से होने वाला अपराध बोध कम हो जाता है, आदमी यह सोचता है कि उसने नेक करके गुनाह का प्रायश्चित कर लिया है। ऐसे में उसके मन में अपने प्रति घृणा का भाव कम हो जाता है। दूसरे गुनाह और नेक कर्मों में संतुलन भी बना रहता है। 

       A man should avoid committing a sin. However, if he falls a victim of committing a sin, he should do some noble deed to reduce its gravity. Nobody knows that in the last, he will or not get the time to recollect those sins and if he gets time, it will not fall short for reducing gravity of the sins.

Thursday, August 11, 2016

क्रोध पर नियंत्रण पाने के लिए क्या करें : What to do for getting control over anger

Friends !

            If we want to avoid anger, we should exercise tolerance and patience. We should learn to forgive others for their mistakes.
             यदि हम क्रोध पर नियंत्रण करना चाहते हैं तब हमें धैर्यवान और सहनशील बनने का अभ्यास करना चाहिए और दूसरों की गलतियों के लिए उन्हें क्षमा करना सीखना चाहिए।


Tuesday, August 9, 2016

कितना एहसान फरामोश है आदमी : HOW UNGRATEFUL THE MAN IS

मित्रो !
        कितने अज्ञानी हैं हम। जब कोई हम पर कोई छोटा सा भी उपकार करता है तब हम उसका तो शुक्रिया अदा करते हैं किन्तु हम उस सर्वशक्तिमान का शुक्रिया अदा नहीं करते जिसने हमें सब-कुछ दिया है और जिसकी कृपा पर हम जिन्दा हैं। हमारी हर सांस जिसकी कृपा पर निर्भर है हम उसी को भुला बैठे हैं।

       How ignorant we are. When somebody does a small favor to us we thank him but we have forgotten to thank the almighty who has given us everything and on whose grace we are alive. We have forgotten Him on whose grace our every breath comes and goes.

Monday, August 8, 2016

How Ignorant We Are

Friends !
           How ignorant we are. When somebody does a small favor to us we thank him but we have forgotten to thank the almighty who has given us everything and on whose grace we are alive. We have forgotten Him on whose grace our every breath depends. Our every breath is indebted to Him.